Friday, November 24

नीरजा को भारत सहित अमेरिका और पाकिस्तान ने भी दिया था सम्मान, मिला “द हीरोइन ऑफ द हाईजैक” का नाम

भारत की बेटी नीरजा भनोट ने अपनी 23 साल की उम्र में आतंकवादी हाईजैकर्स से 360 यात्रियों की जान बचाई थी और ऐसा करते हुए वह शहीद हो गयी । नीरजा के बारे में लोगो को अवगत कराने के लिए उनकी एक बायोपिक भी 19 फरवरी 2016 को रिलीज हुई , जिसमें सोनम कपूर ने उनके रोल को प्ले किया है।

फैमिली बैकग्राउंड एंड एजुकेशन :-
नीरजा का जन्म 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में हुआ था । उन्हें उनके घरवाले लाडो के नाम से पुकारते थे ।
उनके पिता  हरीश भनोट मुंबई में पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते थे । और माँ का नाम रमा भनोट है ।

नीरजा ने अपनी शिक्षा  चंडीगढ़ के सैक्रेड हार्ट सीनियर सेकेण्डरी स्कूल  से ही की थी । इसके बाद उनकी शिक्षा मुम्बई के स्कोटिश स्कूल और सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज  में हुई।

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शादी:-

सन् 1985 को नीरजा का विवाह संपन्न हुआ और वह पति के साथ खाड़ी देश में रहने लगी । परन्तु उनकी अपने पति के साथ तालमेल नहीं बन पाई जिससे कुछ दिनों बाद दहेज के दबाव को लेकर इस रिश्ते में खटास आ गई और विवाह के दो महीने बाद ही पति को छोड़कर  वापस मुंबई आ गयीं।

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इसके बाद उन्होंने पैन एम में विमान परिचारिका (एयर होस्टेस) की नौकरी के लिये अप्लाई किया और चुने जाने के बाद मियामी में ट्रेनिंग कर वापस मुंबई लौटीं।

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विमान अपहरण की घटना:-
नीरजा भनोट मुंबई में पैन ऍम एयरलाइन्स (Pan Am Airlines) की विमान परिचारिका (एयर होस्टेस) थीं। 5 सितंबर 1986 को मुम्बई से न्यूयॉर्क के लिये रवाना हुए पैन ऍम-73 का कराची में 4 आतंकवादियों नेअपहरण कर लिया । उस समय नीरजा की उम्र महज 23 साल थी और ‘Pan Am 73’ में सीनियर फ्लाइट पर्सन थीं।

जैसे ही प्लेन हाईजैक की सूचना मिली वैसे ही चालक दल के तीन सदस्य विमान के कॉकपिट से तुरंत सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गये। और उसके बाद सबसे वरिष्ठ विमानकर्मी के रूप में यात्रियों की मदद के लिए नीरजा ने 17 घंटे तक यात्रियों का हौसला बनाए रखा उसके बाद आतंकवादियों ने यात्रियों की हत्या करना  शुरू कर दी और विमान में विस्फोटक लगाने शुरू किये। यह देख नीरजा ने विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोल दिया और यात्रियों को सुरक्षित निकालने लगी ।

उन्होंने अपने आप को न बचाकर पहले यात्रियों को निकालने का प्रयास किया। ऐसा करते हुए तीन बच्चों को निकालते वक्त जब एक आतंकवादी ने बच्चों पर गोली चलानी चाही तो नीरजा ने बीच में आकार उस आतंकवादी की गोलियों की बौछार को अपने ऊपर ले ली जिससे नीरजा की मृत्यु हुई।
नीरजा के इस वीरतापूर्ण बलिदान के लिए  उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हीरोइन ऑफ हाईजैक  के रूप में जाना जाता है ।

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मृत्यु :- 

नीरजा की मृत्यु 5 सितंबर 1986 को प्लेन हाईजैक में हुई ।

सम्मान / पुरष्कार :-

  • वीरगति के बाद नीरजा को वीरता और साहस के लिए भारत द्वारा  अशोक चक्र से सम्मानित किया गया ।पहली बार यह पदक इस महिला को दिया गया है ।
  • पाकिस्तान की सरकार ने नीरजा को “तमगा-ए-इन्सानियत” से नवाज़ा ।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह  “हीरोइन ऑफ हाईजैक ” नाम से  मशहूर हुई ।
  • 2004 में भारत सरकार द्वारा  एक डाक टिकट भी जारी किया गया ।
  • 2005 में अमेरिका ने उन्हें जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड  दिया।

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नीरजा भनोट पर आधारित एक फिल्म बनाई गयी जिसमे सोनम कपूर ने उनका रोल प्ले किया |

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