Saturday, July 21

जानिए आर के नारायण की मेरी जीवन गाथा !

जब कोई ब्यक्ति बचपन में छोटी छोटी गलतिया करता है तो उस किये गए गलती को वयस्क होने के बाद वो व्यक्ति अपने बचपन की गलती के बारे में किसी को बताता  है की जब मैंने ये गलती की थी तो मै छोटा था और बहुत लोग तो अपने बचपन में की गई गलती को किसी के सामने बोलने से कतराते है। लेकिन शायद अपनी उन बचपन की यादों को लोगो तक पहुचाने में अंग्रेजी में कहानी लिखने वाले आर के नारायण ( R K NARAYAN ) ने कोई कंजूसी नहीं बरती। जिसके उनकी लिखी किताब पढने वाले पाठक को वो बात महसूस होती है जो आर के नारायण बताना चाहते है। आर के नारायण का जन्म ब्रिटिश इंडिया के मद्रास में हुआ था जो की अभी चेन्नई के नाम से जाना जाता है इनका पूरा नाम राशिपुरम कृष्णस्वामी नारायणस्वामी था इनका जन्म 10 अक्टूबर 1906 को हुआ था और निधन 94 साल बाद 13 मई 2001 को हुआ। अपनी सम्पूर्ण जिंदगी में कई उपन्यास लिखे।

 

आर के नारायण को अनेको पुरस्कार के नवाजा गया।

 

उनके ( R K NARAYAN ) द्धारा लिखी गई किताब जो ब्यक्ति पढता है वो एक अलग ही किताब की दुनिया में लीन हो जाता है। भारतीय होने के बावजूद इंग्लिश में किताब लिखते थे लेकिन किताब पढने वाले को अपनी मिट्टी से जुड़े होने का अंदाज अपनी बातो में बया करते थे। उनके कहानी लिखने का यही अंदाज उन्हें आम से खास बनाता है। उन्होंने अपनी किताब “my days” में अपनी जीवन के उस हिस्से को भी दर्शाया है जो आज के युवा वर्ग के लोग भूल जाते है।
 उनके द्धारा लिखी गई किताब “The Guide” को लोगो ने बहुत पसंद किया।  इसके लिए उन्हें बहुत सारे अवॉर्डों से भी सम्मानित क़िया गया। उनके द्धारा लिखी गई कुछ कहानियो को फिल्मो और टीवी में भी दर्शाया गया। अपने किताब के माध्यम से उन्होंने दुनिया के सामने अपने जीवन के वो सारे पलों का जिक्र किया। यहाँ तक की जवानी में हुई घटना को अपने किताब के माध्यम से लोगो को बताने में उन्होंने संकोच बिलकुल भी नही किया ।
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उनके लिखे गए उपन्यासों को कर्णाटक में टीवी सीरियल के रूप में भी दर्शाया गया। उन्होंने अपनी जिंदगी के एक एक पल के एहसास को किताबो और उपन्यासों का रूप दिया। एक लेखक को लोग तभी पसंद करते है जब पढ़ते समय [पाठक को लगता है की इस बात में कोई सच्चाई है। कुछ लोगो को तो पता भी नही होता है की लिखने वाले ने किसी कहानी के बारे में कितनी गहराई में जाकर सोचा होगा। लेकिन आर के नारायण द्धारा लिखा गया उपन्यास जो कोई भी पढता था वो उनका दीवाना हो जाता था।
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