Wednesday, August 16

किन्नरों का जीवन आम इंसान से कैसे है अलग

कई बार हम सोचते है कि आखिर ये किन्नर ( kinnars ) होते कैसे है | किन्नरों का जीवन आम इंसान से कैसे है अलग| ये हिजड़ा ( kinnar ) बनते कैसे है | उनका जीवन कैसे चलता है | क्या उनकी शादी होती है या नहीं | इस तरह के कई ख्याल हमारे दिमाग में आते रहते है पर असल में है क्या , यह नहीं जानते |
सामान्यतः इस धरती पर दो तरह के लिंग वाले जन्म लेते हैं | एक स्त्री ( female ) और दूसरा पुरुष ( male ) | इन दो लिंग के अलावा जो तीसरा लिंग ( gender ) जन्म लेता है वह हिजड़ों ( transgender ) का होता है | आइये जानते है, How the life of kinnars are different from ordinary people.

हिजड़ा ( छक्का ) जन्म होने का कारण :-
यह सब hormones की गड़बड़ी के कारण होता है | भ्रूण के विकास के समय अगर सेक्स ( sex ) करते समय हॉर्मोन्स का स्तर ( level ) असामान्य हो जाता है तो इस तरह का लिंग बनने लगता है | जिसका नतीजा एक hijra पैदा होता है | ये आधे नर और नारी की तरह अपना जीवन व्यतीत करते हैं |

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हिजड़ों के परिवार में वृद्धि :-
जब कोई किन्नर जन्म लेता है तो दूसरे किन्नर उस बच्चे को अपने ग्रुप ( group ) में शामिल कर लेते हैं | नए किन्नरों का स्वागत बड़े धूम धाम से करते हैं | ये किन्नर अपनी ज्यादातर परम्पराएं हिन्दू धर्म के मुताबिक निभाते हैं |

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किन्नरों का विवाह :-
किन्नर अपना एनुअल फंक्शन साल में एक बार मनाते है जिसके लिए वे चेन्नई से 200 मील दूर कूवगम गांव में जाते हैं | यह कार्यक्रम पूरे 18 दिन तक चलता है | इस festival में पूरे भारत की किन्नर जमा होते हैं | हिजड़ों के आराध्य देव भगवान अरावन है | इस पूजा में हिजड़ो की साल में एक बार शादी भगवान अरावन के साथ होती है। किन्नर मंगलसूत्र भी पहनते हैं। आखरी दिन गांव में अरावन की मूर्ती को घुमाकर तोड़ दिया जाता है। उसके बाद दुल्हन बने किन्नर अपना मंगलसूत्र तोड़कर विधवा की तरह सफेद कपड़े पहन लेते हैं। और शोक मानते हैं |

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किन्नरों की सोच और संस्कार :-
किन्नर खुद दोबारा किन्नर रूप में जन्म नहीं लेना चाहता है | इसके लिए वे बहुचरा माता की पूजा करते हैं और दुआ करते हैं कि अगले जन्म में भी उन्हें किन्नर का जन्म ना मिले। किन्नरों का अपना भी गुरु होता है जो कि खुद पैदाइशी किन्नर होता है | कहते है कि गुरु को यह आभास हो जाता है कि उसके कौन से शिष्य की मौत कब होगी। किन्नरों की मृत्यु के बाद उनकी शव यात्रा रात में निकाली जाती है |

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